Sunday, May 20, 2018

बंद करो...... बंद करो......( कविता )

बंद करो...... बंद करो......

कुछ तो सोचोे कुछ तो समझो बंद करो बंद करो ।

इस बात पर उस बात पर बंद करो बंद करो ।

मरता है कोई मर जाए

भूखा कोई  मर जाए।

राजनीति का पूरा चक्कर

वोट ही अपने काम आए ।

आज करो कल करो बंद करो बंद करो ।

बात कोई भी हो जाए

जनता को भाए न भाए।

यही तो अपना धंधा भाई

यही तो अपने काम आए।

रोज करो रोज करो बंद करो बंद करो ।

वो अपनी ताकत दिखलाए

हम पीछे कैसे रह जाए।

ताकत का यही है चक्कर

फिर एक बंद हो जाए।

बस यही नेक काम करो बंद करो बंद करो ।

चुनाव पास जो आए

जनता को कैसे भरमाए।

राम ही नैया पार लगाए

करनी अपनी कैसे बतलाए।

दूजे को नंगा सरेआम करो बंद करो बंद करो ।

जनता मुट्ठी भींचे जाए

तुमको ये समझाती जाए।

नाटक न ये बार बार करो

हमारी समझ में सब ही आए।

ये तमाशा न रोज करो बंद करो बंद करो ।

बकवास तुम्हारी चल जाती है

रोजी रोटी हमारी छिन जाती है।

उस दिन भूखे रहते है बच्चे

जो नेतागिरी तुम्हारी चल जाती है।

गुण्ड़ागर्दी न अब आम करो बंद करो बंद करो ।

कुछ तो सोचो कुछ तो समझो बंद करो बंद करो ।

इस बात पर उस बात पर बंद करो बंद करो ।

                                         आलोक मिश्रा

                                         मोहझरी

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