मन करता है...
चुप रहने से मन घुटता है,कुछ कहने से मन ड़रता है ।
कोर्इ वादा करके मुकर गया,याद करने को मन करता है ।।
क्या बोलूं ,कैसे बोलूं ।
सच आप सुन नहीं सकते ।
झूठ मैं कह नहीं सकता।
अब तो मौन रहने को मन करता है ।।
चुप रहने से मन घुटता है,कुछ कहने से मन ड़रता है ।
वादों पे दुनिया कायम है ।
इरादों पे दुनिया कायम है।
कायदों से कुछ हो नहीं सकता ।
अब़ कायदे तोड़ने को मन करता है।।
चुप रहने से मन घुटता है,कुछ कहने से मन ड़रता है ।
झूठा सच्चा दिखता है ।
सच्चा भूखों मरता है।
र्इमान भी है बिक सकता ।
र्इमान का सौदा करने को मन करता है ।।
चुप रहने से मन घुटता है,कुछ कहने से मन ड़रता है ।
काश बच्चाें सा हंस पाता ।
काश बच्चों सा कह पाता।
वही तो सच्चा लगता है।
फिर बचपन जीने का मन करता है ।।
चुप रहने से मन घुटता है,कुछ कहने से मन ड़रता है ।
कुछ नियम तोड़ने है ।
कुछ राहें चुननी है ।
कुछ जुदा है हो सकता।
अलग कुछ करने को मन करता है ।।
चुप रहने से मन घुटता है,कुछ कहने से मन ड़रता है ।
कुछ बेजा सवाल है ।
उनके अजीब जवाब भी।
कैसे मूल्यांकन हो सकता है।
चिंतन करने का मन करता है।।
चुप रहने से मन घुटता है,कुछ कहने से मन ड़रता है ।
आलोक मिश्रा
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