एक आदमी
दूसरे आदमी से मिलता है।
पूछता है कैसे हो?
आदमी आदमी को
जवाब देता है... ठीक हूँ ।
आदमी आगे बढ जाता है ।
इस भीड़ में
हर आदमी
दूसरे आदमी से
पूछ रहा है
कैसे हो?
जवाब में
ठीक होनॆ का
भ्रम पा रहा है ।
जबकी
जानते है
कुछ ठीक नहीं है ।
आतंकवादी आतंकवादी को
बम
दे रहा है।
नेता नेता को
खदान
घर
हेलीकाप्टर
बांध
नहरें....
और न जाने क्या-क्या?
अफ्सर अफ्सर को
झिड़की दे रहा है ।
व्यापारी व्यापारी को
गुरूमंत्र
लाईसंस
नेता
आफ्सर
और न जाने क्या-क्या
आदमी है
भ्रम में
सब ठीक है ।
आलोक मिश्रा
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