शब्द ‘‘दबंग’’ सुनते ही आपके मन में एक ही विचार और व्यक्ति आया हो सकता है ‘‘हुड़.........हुड़.........दबंग......दबंग......., सलमान ।’’ अरे वो तो केवल पर्दे के ही दबंग है । किस्से कहानियों में दबंग पूर्णतः ईमानदार और अकेला ही निड़रतापूर्वक लड़ता हुआ दिखाई देता है । वास्तविक जीवन में ऐसे व्यक्ति बेवकूफ कहलाते हैं । मैं तो पैदा होते ही दबंग की तलाश मे लग गया था , मुझे पिछले पचास वर्षों में कोई भी दबंग नहीं मिला । हाॅं कल्पनाओं के दबंग न भी मिले हो , वास्तविक जीवन के बहुत से दबंग अवष्य ही मिले । ये सारे अपने क्षेत्रों के महारथी थे । इनका अपने- अपने क्षेत्रों में लोहा माना जा रहा था या है ।
वास्तविक जीवन के दबंगों से मिलने से पहले हम यह देख लेते है कि दबंग होने के लिए क्या योग्यताएं होनी चाहिए । आपका ध्यान अवश्य ही सबसे पहले उसकी शारीरिक बनावट पर ही गया होगा । दबंग याने पहलवान सा डोले - सोले वाला , ऐसा जो दस- पंद्रह पर अकेला ही भारी हो । यहाॅ आप से निवेदन करना चाहुंगा कि आप गलत है क्योंकि अगर ऐसा ही होता तो आज ओबामा और बीते हुए कल में ओसामा दबंगई से सारी दुनिया को न ड़रा रहे होते । आज दबंग होने के लिए सबसे अधिक आवश्यकता है तो पहुंच की । हमारे समाज में दबंग वो है जो या तो कुर्सी पर विराजमान है या उसे किसी कुर्सी का आशिर्वाद प्राप्त है । दबंग वो है जो खुद खाता है और उपर वालों को भी मलाई खिलाता है । दबंग वो है जो पैसे से पैसा बनाता है । दबंग वो है जो कथड़ी ओढ कर घी खाता है । दबंग वो है जो अपराधों में लिप्त होने के बावजूद भी समाज में प्रतिष्ठित कहलाता है। दबंग वो है जो अपने से आगे बढने की कोशिश करने वालों को उलझनों में फसाता है। हमारे समाज में कुर्सी और पैसा दबंगता का पर्याय है । यदि कोई व्यक्ति हर बात में मंत्री , मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री से अपने संबंधों का उल्लेख करता हो या बात -बात में लाख- दस लाख या करोड- दस करोड़ की बात करता हो तो आप को सावधान हो ही जाना चाहिए क्योकि अवष्य ही वो दबंग हो सकता है । वैसे ये फार्मूला आप भी अपना कर छोटे - मोटे लाभ प्राप्त कर लें तो मुझे अवश्य ही याद कर लेना ।
समाज में बड़े स्तर पर दबंगता देखनी हो तो उनकी देखिए जिन्होंने फुटपाथ पर गरीबों को कुचल दिया और बड़े ही आराम से प्रतिष्ठित जिंदगी बसर कर रहे है । ऐसे दबंगों के साथी समर्थन में कहना नहीं चूकते कि ‘‘फुटपाथ सोने की जगह नहीं है ।’’दबंग होना इसे कहते है कि किसी अपराधी मानवीय आधार पर की गई सहायता को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर ले । दबंगई तो ये है कि यदि कोई आपके विरूद्ध बोलने की कोशिश भी करे तो उससे जीवन जीने का अधिकार ही छीन लो । फिर किसी की क्या मजाल कि किसी थाने में आपका नाम भी आ जाए । दबंग तो वे पत्रकार है जो झूठ सच का व्यापार अपने फायदे के लिए ही करते है । इसी व्यवसाय से जुड़े वे समाचार चैनल भी दबंग कहलाने के हकदार है जो बड़ी ही बेशर्मी से कुर्सी के फेके गए टुकड़ों के लालच में समाचार को ही विज्ञापन बना देते है । दबंग तो वे लोग भी है जो विरोधियों को पाकिस्तान भेजना चाहते है । इसी कड़ी में वे भी दबंग है जो पाकिस्तान से दोस्ती की किसी भी पहल को नकारते है , चाहे इसके लिए उन्हें क्रिकेट मैदान की पिच ही क्यों न खोदना पड़े । दबंग तो वे लोग है जो देश को बांटने के लिए मुंबई में उत्तर भारतियों को मारते है । नेताओं की दबंगई तो देखते ही बनती है जब वे पूरी दबंगई के साथ अपने चूनावी वादों से मुकर जाते है ।
हमारे आस - पास बड़े दबंगों की बड़ी ही लम्बी फेहरिस्त है । कुछ छोटे दबंगों पर भी निगाह ड़ाल लेते है । कुछ शिक्षक अपनी दबंगई के चलते शिक्षा को छोड़ कर दुनिया -जहान के काम करते है । कभी कभी आराम फरमाने के लिए ही शाला आ जाया करते है । बाबू वो दबंग है जो बिना कुछ लिए -दिए किसी फाईल को आगे ही नहीं बढाता और कुछ कमा कर घर जरूर ले जाता है । अधिकारी वो दबंग है जो धौस तो पूरी मारता है पर हर टेबल से कमीशन भी खाता है । डाॅक्टर और इंजीनियर की दबंगई तो शायद ही किसी से छुपी हो । मृत व्यक्ति को आई.सी. यू. में रख कर पैसे कमाने और उद्घाटन के दिन ही बिल्डिंग गिराने जैसे कारनामे भी अब आम होते जा रहे है । ़अब तो करोड़पती दबंग चपरासियों के नाम भी इस सूची में आने लगे है । कुछ ठेकेदार और व्यापारी भी राजनैतिक रोटियां सेकते हुए जनता को पूरी दबंगई के साथ बेवकूफ बनाने में लगे रहते है । इन सब छोटे दबंगों को दबंग बनाए रखने के लिए एक अदद् विधायक , सांसद या मंत्री की आवष्यकता होती है । अनेक अधिकारी, कर्मचारी पूरी दबंगई के साथ जीवन पर्यन्त एक ही स्थान पर सेवा या मलाईदार स्थान पर सेवा केवल और केवल इन्ही कृपालू दबंगों की बदौलत ही दे पाते है । ठेकेदार और व्यापारियों के लिए यह बहुत ही सरल मार्ग है , बस हमेशा ही सत्तारूढ लोगों के साथ होने का दिखावा करते रहना होता है । इस पूरे प्रकरण में एक दबंग के विषय में यदि कुछ यहाॅ लिखना भी चाहुं तो महाकाव्य से भी अधिक ही लिखना पड़ेगा और आप भी इनके विषय में सब कुछ जानते ही है । मै इस दबंग का केवल नाम ही लुंगा और आप उसकी दबंगई का बखान स्वयम् ही करेंगे तो हाजिर है सबसे बड़े दबंग ........ खाकी वर्दी धारी ......महादबंग ....... पुलिसवाले ।
अब आप से क्या छुपाना हम इतने प्रतिभा सम्पन्न कभी भी नहीं रहे कि दबंग बन सके इसके बावजूद भी हमें अनेक बार उत्प्रेरित किया गया कि हम उनके चरणस्पर्ष कर दबंगता को प्राप्त करे लेकिन ........ । अच्छा अब आपको तो लगने ही लगा होगा कि आपमें दबंग होने के सारे गुण है तो कल से ही आप किसी मंत्री, संत्री या नेता के साथ उठना - बैठना प्ररम्भ कर दें । यदि आपकी सभ्यता को गवारा हो तो इसका जिक्र हर मिलने वाले से करना न भूले । समय- समय पर उनके साथ फोटो खिचवा ले । थोड़े विज्ञप्ति वीर बने । बस फिर क्या है आप भी बन ही गए ............‘‘दबंग ’’
आलोक मिश्रा
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