Sunday, May 27, 2018

घोषणा मंत्रालय( व्यंग्य )



         आपको तो यह मालूम ही होगा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में आपका क्या स्थान है । यदि आप नेता नहीं है ,यदि आप जीवन भर चुनाव लड़ कर जीत नहीें सकते तो आप आम आदमी है । अरे... अरे... भाई आप अपने आपको नई नवेली पार्टी का आम आदमी न समझ लेना । आम आदमी वही होता है ,जिसे आवेदन- पत्र लिखना आता है । जिसे झिड़कियाॅं सुनना आता है । जो किसी भी लाईन में घंटों तक बिना शिकायत खड़ा रह सकता है ; जिसके चुनाव के समय खास लोग पैर छूते घूमते रहते है । ऐसे अवसरों पर आम आदमी के कल्याण के लिए खास लोग घोषणाएॅं किया करते है । ये अलग बात है कि घोषणाएॅं केवल घोषणाओं के लिए ही होती है , अमल में लाने के लिए नहीं । गरीबी और महंगाई समाप्त करने की घोषणा तो पैसठ सालों से वैसी की वैसी ही है । ऐसा लगने लगा है कि ये भी नेताओं की ही तरह स्थाई समस्या है ।
       राजनैतिक लोगों को चुनाव की गंध वैसे ही मिलने लगी है जैसे कि मेंढकों को बारिश की मिलती है । अब वे उछल-कूद करने लगे है अरे... अरे... मेंढक नहीं। नेताओं ने अपनी टोपियों की धूल झाड़ ली है । बाज़ार में कुर्तों के दाम बढने लगे है । वे अब घूम-घूम कर सब को याद दिला रहे है कि वे कब-कब किस-किस के काम आए है । सत्ता में बैठे लोग  हमेशा की ही तरह जनता के टैक्स की कमाई का उपयोग स्वयम् के विकास के पोस्टर ,बैनर और विज्ञापनों पर खर्च करने को अपना अधिकार मानते हुए, अब फिर करने लगे है । 
        एक  समाचार के अनुसार यह फैसला लिया गया है कि आगामी चुनावों को देखते हुए चुनाव के पूर्व विधिवत् अस्थाई घोषणा मंत्रालय गठित किया जा रहा है।घोषणा मंत्री का काम होगा कि यह देखे कि किस क्षेत्र विशेष में किस प्रकार की घोषणाओं से वोट प्राप्त किए जा सकते है । वे अब जनता के बीच से घोषणाओं हेतु मुद्दे खोज कर अपने मंत्रियों तक पहुचाते है । चुनाव की व्यस्तता के कारण अक्सर तो मंत्रीजी उन्हे पढ और समझ भी नहीं पाते । वे सभा के दौरान ही पढते है । इससे अजीब-अजीब घोषणाएॅं भी हो जाती है । इसी तरह वे एक शहर में घोषणा करते-करते चूक गए । उन्हें बोलना था कि मै घोषणा करता हुॅं कि मेरी और मेरी पत्नी की सम्पत्ति सार्वजनिक की जावेगी । वे बोल गए ‘‘ मेरी पत्नी सार्वजनिक की जावेगी। ’’   कहीं वे महिलाओं को फ्री में बेलन देने की बाते कर गऐ तो कहीं पत्नी पीड़ित पतियों को आरक्षण देने की । घोषणा मंत्रालय की रिसर्च टीम के अनुसार लोगों को बिजली ;सड़क; पानी और शिक्षा की समस्याओं के साथ ही साथ भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहिए । मंत्री जी अपने पी.ए. से बोले ‘‘ बिजली ,पानी,सड़क और शिक्षा की जितनी और जो-जो घोषणाए लिखनी हो लिख लेना लेकिन भ्रष्टाचार की बात न करना वर्ना चुनाव लड़ने का फायदा ही क्या । यह भी कि चुनाव के बाद घोषणा मंत्रालय को ही तो भ्रष्टाचार मंत्रालय में बदलना है ।
           जनता को मालूम है कि पिछले चुनाव के पहले दो सौ स्थानों पर विभिन्न निर्माण कार्याें की घोषणा और भूमि पूजन एक ही स्थान पर हुआ था । उसमें से अनेकों सड़के पहले तो कुछ चलने योग्य भी थी अब वे पाॅंच साल से निर्माण की बाट जोहती  उखड़ी हुई पड़ी है । पिछले बार जब मंत्री जी ने लगातार बिजली देने की घोषणा की तो उनके जाते ही सब लोग चार दिन तक अंधेरे में रहे थे । पानी की तो कोई कमी नहीं है बस उसे लाने के लिए दो किलोमीटर जाना पड़ता है । शिक्षा बहुत ही अच्छी है बच्चे खाना खाने स्कूल आते है । पढने-पढाने की तो कोई बात ही नहीं है । शिक्षा सुविधा का चारा  वोट रुपी मछली के गले में अटका ही समझो ।
              आम आदमी उनकी घोषणाओं का भरपूर आनन्द लेने को तैयार है । किसी सभा में उनकी किराए की भीड़ के बीच जब वे घोषणाएॅं कर रहे होते  है तब आप अपने बच्चों के साथ घूम-घूम कर चने और चाट आदि का आनन्द ले रहे होते है । आप को तो उन की घोषणाओं में कोई रुचि नहीं है । वे भी अपनी की हुई घोषणाओं को दुबारा पलट कर देखते भी है या नहीं ? यदि देख लेते तो उन्हें बार-बार वही सब न कहना पड़ता ।   कुछ भी हो घोषणा मंत्रालय की सक्रियता देखते ही बनती है । जो भी हो ये घोषणाएॅं अगले कुछ दिनों तक तो आपको बताती रहेंगी कि हम सुनहरे कल की ओर बढ रहे है । बस चुनाव के बाद यह कल पाॅंच साल बाद ही आएगा । आज तो मजे ले ही लो ।  कल इन घोषणावीरों के आपको और हमें दर्शन हों या न हों ; आप इन घोषणाओं  का लेखा-जोखा रख सकते है लेकिन उन्हें कुछ भी याद नहीं रहेगा । यही तो लोकतंत्र की मूलभूत विशेषता है ।  
                                                      आलोक मिश्रा                     
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                     

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