यादों की रौनक अभी बाकी है ..
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
वो तेरी महक , चूड़ीयों की खनक बाकी है ।
वो तेरे चेहरे की रंगत ,फुसफुसाती चहक बाकी है ।
कई साल हुए , गुज़रे चुके है यादों के जलसे ।
वक्त, के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
वो दीवर की ओट से झांकता चेहरा ।
वो शर्म ओ हया से लाल सा चेहरा ।
आईने पे तेरे लबों की लाली अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
वो दीदार के इंतजार को तरसती आंखे ।
मिलने पर शर्म से झुकी और मुंदी आंखे
मेरे कुर्ते पर तेरे सूरमे के निशां अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
कमबक्खकत वक्ति ने दूर किया था जब हमें ।
फिर मिला देने का झांसा दिया था जब हमें ।
उस बुरे वक्ता की पीर अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
ये तस्सेबुर कि मिले थे हम कभी ।
महका जाता है मेरी शामों को आज भी ।
तू नही , तेरी यादों के सहारे अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्तु के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
वो वादे इरादे , वो आंसूओं की झड़ी ।
टूट के बिखरती हुई वो बेनी की लड़ी ।
किताबों के सूखे फूलों में महक अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्तु के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
वो तेरी महक , चूड़ीयों की खनक बाकी है ।
वो तेरे चेहरे की रंगत ,फुसफुसाती चहक बाकी है ।
कई साल हुए , गुज़रे चुके है यादों के जलसे ।
वक्त, के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
वो दीवर की ओट से झांकता चेहरा ।
वो शर्म ओ हया से लाल सा चेहरा ।
आईने पे तेरे लबों की लाली अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
वो दीदार के इंतजार को तरसती आंखे ।
मिलने पर शर्म से झुकी और मुंदी आंखे
मेरे कुर्ते पर तेरे सूरमे के निशां अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
कमबक्खकत वक्ति ने दूर किया था जब हमें ।
फिर मिला देने का झांसा दिया था जब हमें ।
उस बुरे वक्ता की पीर अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्ते के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
ये तस्सेबुर कि मिले थे हम कभी ।
महका जाता है मेरी शामों को आज भी ।
तू नही , तेरी यादों के सहारे अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्तु के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
वो वादे इरादे , वो आंसूओं की झड़ी ।
टूट के बिखरती हुई वो बेनी की लड़ी ।
किताबों के सूखे फूलों में महक अभी बाकी है ।
कई साल गुज़रे यादों की रौनक अभी बाकी है ।
वो बीते वक्तु के पैरों के निशां अभी बाकी है ।
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