गमों मे भी रोते रोते मुस्कुराना होता है
जिंदगी में हर पल को यूं बिताना होता है
अब तो हाल ये है कि कोई हाल पूछे
बेहतर से पहले अश्क छुपाना होता है
तमाम अश्कों को छुपा कर मुस्कुराना
तहज़ीब का तकाज़ा यही होता है
ड़र लगता कमजोर की रूसवाई का
अश्क भी कमजोरी का निशां होता है
अश्क उमड़ के आते है बारिश की तरह
काम बहुत है फुर्सत में रोना होता है
हंसा लिया जिंदगी भर जमाने को
जोकर का आंसू ही खजाना होता है
चेहरा वीरान है ऐहसास की नुमाईश नहीं
गम को आंसू बन के छलक जाना होता है
हंसता हुआ कोई चेहरा अश्कों डूब जाए
उसे मुस्कुरा के मिलना या चेहरा छुपाना होता है
यूं रो रो कर क्या मिलेगा तुझे "बुत "
जमाने से सब भिड़ कर लेना होता है
"बुत" दूर है दुनियावी ऐहसासों के तूफान से
चेहरे पर शिकन न अश्क छलकना होता है
आलोक मिश्रा "बुत "
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