Tuesday, June 2, 2020

अश्क





गमों  मे भी रोते रोते मुस्कुराना   होता है
जिंदगी में हर पल को यूं बिताना होता है


अब तो हाल ये है कि कोई हाल पूछे
बेहतर से पहले अश्क छुपाना होता है


तमाम अश्कों को छुपा कर मुस्कुराना
तहज़ीब    का  तकाज़ा  यही  होता है


ड़र लगता कमजोर की रूसवाई  का
अश्क भी कमजोरी का निशां होता है


अश्क उमड़ के आते है बारिश की तरह
काम  बहुत  है  फुर्सत  में रोना होता है


हंसा लिया जिंदगी  भर जमाने  को
जोकर का आंसू ही खजाना होता है


चेहरा वीरान है ऐहसास की नुमाईश नहीं
गम को आंसू बन के छलक जाना होता है


हंसता  हुआ   कोई   चेहरा   अश्कों  डूब  जाए
उसे मुस्कुरा के मिलना या चेहरा छुपाना होता है

यूं रो रो कर क्या मिलेगा तुझे "बुत "
जमाने से सब भिड़ कर लेना होता है


"बुत" दूर है दुनियावी ऐहसासों के तूफान से
चेहरे पर शिकन न अश्क छलकना होता है


आलोक मिश्रा "बुत "



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