वो तवायफ की तरह मोल भाव करते रहे
हम गर्म सड़कों पर यूं नंगे पांव चलते रहे
हम गर्म सड़कों पर यूं नंगे पांव चलते रहे
वो कहते रहे खतरा है जान का घर में रहो
हम बस जहां में अपना घर ही खोजते रहे
हम बस जहां में अपना घर ही खोजते रहे
वो लाते रहे सात समुंदर पार से लोगों को
हम सड़कों पर खून की लकीरें बनाते रहे
हम सड़कों पर खून की लकीरें बनाते रहे
वो मौत के ड़र से छुप गए घरों में
हम भूख से ड़र कर सड़कों पर चलते रहे
हम भूख से ड़र कर सड़कों पर चलते रहे
वो वादे पर वादे करते रहे रोज रोज
हम खुदगर्ज बेवजह ही यकीन करते रहे
हम खुदगर्ज बेवजह ही यकीन करते रहे
रोटी के टुकडों ने छुड़ाया था गाँव
रोटी के लिए गाँव की ओर चलते रहे
रोटी के लिए गाँव की ओर चलते रहे
लोगों ने दया की खाना भी दिया
फिर भी साथ के लोग रोज मरते रहे
फिर भी साथ के लोग रोज मरते रहे
मौत से लड़ना था दोनों ही सूरत में
घर में रहे या राहों पर यूं ही चलते रहे
घर में रहे या राहों पर यूं ही चलते रहे
तमाशा बना रहे है फिक्र किसे है हमारी
बीमारी ही मार दे या भूख से मरते रहे
बीमारी ही मार दे या भूख से मरते रहे
जब सारा जहाँ हमारे ही खिलाफ हो गया
जिंदा रहने के लिए खुद से हम लड़ते रहे
जिंदा रहने के लिए खुद से हम लड़ते रहे
भरोसा था उनसे उम्मीद थी मदद की
वो "बुत " बन कर खड़े अकड़ते रहे
वो "बुत " बन कर खड़े अकड़ते रहे
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