गुमनाम हुआ हुँ मैं
बदनाम था तो मशहूर था अब गुमनाम हुआ हुँ मैं ।
शराफ़त से जीना क्या सीख लिया भीड़ में गुम हुआ हुँ मैं ।
सच्चा हुँ सच्चा हुँ सच बोलता हुँ मैं ।
ईमानदार हुँ ईमान से रहता हुँ मैं ।
ठगता रहा दूसरों को नहीं ख़ुद को ही
ख़ुद से ही झूठ बोलता हुँ
मैं ।
बदनाम था तो मशहूर था अब गुमनाम हुआ हुँ मैं ।
शराफ़त से जीना क्या सीख लिया भीड़ में गुम हुआ हुँ मैं ।
सब सोचते है बहुत घूमता
हुँ मैं ।
जमाने के हर प्रपंच में डोलता हुँ मैं ।
जो दिखता है वो कोई और
है
मन के पिंजरों में बंद रहता हुँ मैं ।
बदनाम था तो मशहूर था अब गुमनाम हुआ
हुँ मैं ।
शराफ़त से जीना क्या सीख लिया भीड़ में गुम हुआ हुँ मैं ।
लक्ष्य से आगे सोचता
हुँ मै ।
पराजय की आशंका से ड़रता हुँ मैं ।
विजय के स्वप्न की योजनाओं में
राह से भटक
जाता हुँ मैं ।
बदनाम था तो मशहूर था अब गुमनाम हुआ
हुँ मैं ।
शराफ़त से जीना क्या सीख लिया भीड़ में गुम हुआ हुँ मैं ।
चरणवंदन के आग्रह थे बहुत ।
चारण के रिक्त पद भी थे बहुत ।
मैने इंकार करना
सीख लिया
लो अब उनसे आज़ाद हुँ
मैं ।
बदनाम था तो मशहूर था अब गुमनाम हुआ हुँ मैं ।
शराफ़त से जीना क्या सीख लिया भीड़ में गुम हुआ हुँ मैं ।
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