मेरी पवित्रता पर प्रश्न उठाने वालों ।
मेरे कपड़े उतारने पर प्रश्न उठाने वालों ।
सोचो मेरे होने पर भी तुम ,
अपनी बहन, बेटी और मासूम को नोच खाते हो ।
हम न हो तो ,
तुम्हारी माँऐं भी न बचेंगी ।
मेरी पवित्रता पर प्रश्न उठाने वालों।
दिन के उजाले में उजले लोगों ।
अंधेरों में कोठों के चक्कर लगाने वालों ।
तुम्हारी वासना हवस तुम पर हावी है ।
मेरा मोल भाव करने वाले लोगों।
तुम्हारी हैवानियत तुम पर हावी है ।
हमसे पहले
अंधेरे में खुद का नाड़ा खोलने वाले लोगों ।
मै तुम्हारी ही गंदगी का आईना हुँ।
हाँ मै वैश्या हुँ ।
हाँ मै गाली हुँ ।
हाँ मै नाली हुँ ।
मै हुँं स्त्री पुरूष संबंधों का बाज़ार ।
इस बाज़ार में तुम खरीददार।
मै माल हुँ।
शरीर मेरा बिकता है ।
आत्मा तुम्हारी बिकती है ।
ओ मेरे बाज़ार की रौनक ।
मेरे हैवान ग्राहक ।
मै तुम्हारी सच्चाई हुँ ।
मै तुम्हारा सुलभ हुँ ।
मै रास्ते का घूरा हुँ ।
मै आवश्यकता हुँ ।
मेरे बाज़ार रौनक ।
तुम से है ।
मेरे पास आने वाले लोगों ।
तुम ही हो मेरे जन्म दाता ,
ओ भूखे भेड़ियों।
मेरी पवित्रता पर प्रश्न उठाने वालों।।
आलोक मिश्रा बुत
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