Sunday, August 30, 2020

कराह सकूं इतनी तो मोहलत दे दे ।

 

कराह सकूं  इतनी तो   मोहलत दे दे ।
सज़दा कर सकूंं इतनी तो ताकत दे दे ।


मालूम   है   आज  तू  नाराज़  है  बहुत
मुझे मेरा खुदा कहने की इजाजत दे दे ।


आस पास तकलीफों का रोज़ ही मंजर है
सह लुंगा जो तू मुझे सहने की ताकत दे दे ।


तेरे  रूसवा  होनें  से बदल गया ज़माना
मुझे भी थोड़ा बदलने की फितरत दे दे ।


पत्थरों पर सर फोड़े एहसास भी न रहे
आएगी  बहार  फिर  ये  हसरत  दे  दे ।


खुलूस  से मिला जमाने से नेकी भी की
अब जमाने की तरह तू भी तहमत दे दे ।


बहुत हुआ छौने को ड़रान धमकाना
अब  तो  थोड़ी  सी  मुहोब्बत  दे  दे ।


लड़ेने की तुझसे कूवत नहीं मेरी
बस  तू  मुझे  मेरी जरुरत दे दे ।


बुत है .. बुत है तू कोई खुदा नहीं
खुद ही खुदा होने का सबूत दे दे ।

       आलोक मिश्रा मनमौजी 


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