कराह सकूं इतनी तो मोहलत दे दे ।
सज़दा कर सकूंं इतनी तो ताकत दे दे ।
मालूम है आज तू नाराज़ है बहुत
मुझे मेरा खुदा कहने की इजाजत दे दे ।
आस पास तकलीफों का रोज़ ही मंजर है
सह लुंगा जो तू मुझे सहने की ताकत दे दे ।
तेरे रूसवा होनें से बदल गया ज़माना
मुझे भी थोड़ा बदलने की फितरत दे दे ।
पत्थरों पर सर फोड़े एहसास भी न रहे
आएगी बहार फिर ये हसरत दे दे ।
खुलूस से मिला जमाने से नेकी भी की
अब जमाने की तरह तू भी तहमत दे दे ।
बहुत हुआ छौने को ड़रान धमकाना
अब तो थोड़ी सी मुहोब्बत दे दे ।
लड़ेने की तुझसे कूवत नहीं मेरी
बस तू मुझे मेरी जरुरत दे दे ।
बुत है .. बुत है तू कोई खुदा नहीं
खुद ही खुदा होने का सबूत दे दे ।
आलोक मिश्रा मनमौजी