Thursday, October 17, 2019

दर्द ( गज़ल)


गज़ल
जब दर्द- ऐ -ऐहसास हद से गुज़रने लगा
मै बेशाख़ता* तन्हाईयों मे हंसने लगा ।
ज़प्त कर जाउंगा अपने ऐहसास को
लो फिर उसी गली से गुज़रने लगा ।
तेरी बदकारियों* का गुमान* है हमें
क्या करूं मोहब्बत मै करने लगा  ।
तेरे ख़यालों में रहते है हर लम्हा
अब तो वक्त युंहीं गुजरने लगा ।
क्या किस्सा है तमाशा बरपा है क्यों
हुजूम में  ईमानवाला दिखने लगा ।
औधें मुह गिरे राह में जख्म भी हुए
बद्दूआओं का असर दिखने लगा ।
ऊंचाईयों पर रुक सोचा जो एक बार
जमाने का हर सख्स छोटा लगने लगा  ।
बहुत टीस देती है तुम्हारी यादें
फिर जख्मों को कुरेदने लगा ।
इंसानों की दुनियाँ में "बुत"बन के खड़ा हुँ मै
अब तो इंसानों से भरोसा भी उठने लगा ।
आलोक मिश्रा बुत
*

बदकारियों*  -बुराईयाँ
बेशाख़ता*- अचानक
गुमान* - अनुमान
ज़प्त* - सहन करना


सच कहता.हुँ (कविता)


दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।
                        सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

         भाषा का जंजाल नही
          कल्पना का संसार नहीं
            आदर्श का दिखावा नहीं
                         धारातल का संसार लिखता हुँ मै

दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।
                   सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

         शब्दों की मर्यादा नहीं
         साहित्य की समझ नहीं
          व्याकरण का अनुसरण नहीं
                                 मन की कहानी लिखता हुँ मै

दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।
                  सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

          छंदो में हो रस नहीं
           रागों में हो स्वर नहीं
           तुक से सरोकार नहीं
                              गीत दर्द के लिखता हुँ मै

दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।
               सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

          तख्त की परवाह नहीं
           वैभव की पनाह नहीं
            वाह की भी चाह नहीं
                                दुख की कराह लिखता हुँ मै

 दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।
                  सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

             जो अब तक बोले नहीं
              जिन्होंने लब खोले नहीं
               दुख सहे पर ड़ोले नहीं
                                    उनकी आवाज  लिखता हुँ मै

दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।
                 सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

              आस पास है पर दिखते नहीं
                जो गरीब है पर बिकते नहीं
               जो हार कर भी रूकते नहीं
                                    उस  हौसले की कथा लिखता हुँ मै

दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।
                   सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

              चारण की कथा नहीं
               प्रेयसी  की व्यथा नहीं
               कल्पना अथाह नहीं  
                                  आप पास की बातें लिखता हुँ मै

दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।
                    सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

             नायक कोई राजा नहीं
              नायिका कोई रानी नहीं
               ये तो  प्रेम कहानी नहीं
                             राह चलते की बात लिखता हुँ मै

दिल की बातें लिखता हुँ मै
दिल की बातें कहता हुँ मै।
झूठ को झूठ कहता हुँ मै
सच को सच कहता हुँ मै।

  सच कहता हुँ मै सच कहता हुँ मै ।

  

आलोक मिश्रा बुत