जिन्दगी यूहीं
कट गई मेरी तो
मिला न स्नेही
∆
मधुशाला थी
पिया मधु कर्म का
पाठशाला थी
∆
राजनीति में
दल पद नेता है
जोड तोड में
∆
गुलाब बोला
सीखो कुछ कॉंटों से
मै तो हॅुं भोला
∆
चुनाव आए
अब नेता फिर से
दिखे टर्राए
कट गई मेरी तो
मिला न स्नेही
∆
मधुशाला थी
पिया मधु कर्म का
पाठशाला थी
∆
राजनीति में
दल पद नेता है
जोड तोड में
∆
गुलाब बोला
सीखो कुछ कॉंटों से
मै तो हॅुं भोला
∆
चुनाव आए
अब नेता फिर से
दिखे टर्राए