Saturday, April 13, 2019

बुरा तो मानों ...... होली है (व्यंग्य)



बुरा तो मानों...... होली है ( व्यंग्य)



    लो साहब होली आ गई । सब ओर नारा लगने लगा ‘ बुरा न मानो .... होली है ।  वैसे भी हम भारतियों की परंपरा रही है कि होली हो या न हो हम बुरा नहीं मानते । देश का पैसा कोई माल्या या कोई मोदी ले भागता है , हमें बुरा नहीं लगता । हमें तब भी बुरा नहीं लगता जब गाय के लिए इन्सान को मार दिया जाता है  और तो और पाकिस्तान हमारे सैनिकों को मारता रहता है तब भी हमें बिलकुल बुरा नहीं लगता । हम इस वाक्य को अपने जीवन में इस कदर उतार चुके है कि जब हम खुद अपने दफ्तर या स्कूल -कालेज देर पहुॅचते है तो हमें बिलकुल बुरा नहीं लगता । हम रिश्वत देने या लेने में भी बुरा नहीं मानते । ये अलग बात है कि हम हमेषा ही रिश्वत बुरा बताते रहते है ।



    अब केवल होली में बुरा न मानना छोटी - मोटी बात है । हम तो इतने महान है कि अपने नेताओं के बचकाने बयान रोज सुन कर भी बुरा नहीं मानते । नेता जी जो पिछली बार चुनाव जीत गए थे ,पॉच साल तक गायब रहने के बाद पुनः चुनाव के समय आपके चरणस्पर्श करते तो बुरा मानना तो दूर की बात है ; आप तो खुश हो जाते है । प्रवचन देने वाले पाखंडी धर्म गुरूओं के उनकी शिष्याओं के साथ रंगरेलियों के किस्से जब आम होते है तो लोग उसे चट्खारे ले कर पढते, सुनते और चर्चा करते है , बुरा नहीं मानते । कुछ लोग जब यह कहते है कि हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख्ख और इसाई हम सब है भाई-भाई परन्तु हमें आपस में एक दूसरे खतरा है तो भी हमें बुरा नहीं लगता । किसी सरकारी काम के पूरा होने पर पता लगता है कि इस काम में केवल दस प्रतिशत का ही घोटाला हुआ है तो आपको और हमें बहुत संतोष होता है , बुरा नहीं लगता ।



     हम लोगों ने बुरा मानना छोड़ ही दिया है । हम तो यह मानते है कि जो हुआ अच्छा हुआ , जो हो रहा है अच्छा हो रहा है और जो होगा अच्छा ही होगा । इस विचार के साथ हम बड़े ही दार्शनिक अंदाज में अपने आप को सकारात्मक सोच वाला बताने में नहीं चूकते । कुछ लोग इस बात को धार्मिक दृष्टिकोण से भी लेते है । ये दोनों ही विचारों ने हमें बुरा न मानने के लिए ही प्रेरित किया  है । वैसे एक और व्यवहारिक दृष्टिकोण भी है जिसके कारण आप और हम लोग बुरा मानने से बचते रहते है । वो है कि यदि आप बुरा मान भी गए तो किसका क्या बिगाड लेंगे ? ये सारे के सारे दृष्टिकोण ही हमें बुरा मानने से दूर रखते है । बस इसी चक्कर में हमें बहुत सी बुरी लगने वाली चीजें बुरी नहीं लगती ।



     अब समय आ गया है जब आम जनता को बुरा मानना प्रारम्भ कर देना चाहिए । अब हमारा और आपका नारा यह होना चाहिए कि ‘‘बुरा तो मानों ....... होली है ..... या नहीं है । ’’ ओ भाई होली है तो क्या नषा करोगे , होली है तो क्या लड़कियों से छेड़खानी करोगे और होली है तो क्या अभद्र भाषा बोलोगे ? बुरा तो माना ही पड़ेगा यदि बुरा न माना तो यह सब स्विकार्य हो जाएगा । होली में ही क्यों हमें तो बुरी बातों पर हमेशा ही बुरा माना होगा । घोटाले , कालाधन और रिश्वत पर बुरा मानना हमारा अधिकार है , इन पर बुरा लगना ही चाहिए । अफसरों और नेताओं की सांढ-गांढ , भाई - भतीजावाद और जातिवाद या सांप्रदायवाद पर बुरा मानना ही होगा । जो लोग हमें इन्सान न मान कर वोट  और जाति मानते है उन्हें बुरा कहने में कोई बुराई नहीं होनी चाहिए ।



    अब हमें बुरा मानने की परंपरा प्रारम्भ करनी ही होगी । आपको बुरा लगे तो दूसरे को बताओ , वो तीसरे को बताऐगा । इस तरह हमारे आस - पास बुरी चीजें बुरी और अच्छी चीजें अच्छी बनी रह सकती है । बुराई और अच्छाई का अन्तर ही आपके बुरा मानने पर ही निर्भर करता है । अब आप होली मनालो इस नारे के साथ ‘‘ बुरा तो मानों ........ होली है।



       आलोक मिश्रा





..

Monday, April 8, 2019

पाक स्थान (व्यंग्य)


पाक स्थान      (व्यंग्य)

आपने षीर्षक तो ध्यान से पढा है न ? यहॉं हम अपने उस पडोसी की बात नहीं कर रहे है जिसे लाख कोषिषों के बाद भी हम बदल नही सके । हमारा पडोसी पाकिस्तान हमेषा ही हमें अपने दिल में सजाए रखता है । उसके लिए हम इतने महत्वपूर्ण है कि वो जान जाए जलेबी खाए को चरितार्थ करते हुए हमेषा ही घुसपैठ की कोषिष में लगा रहता है अब इसमें उसके कुछ लोग मरते है तो मरते रहे । हमारे इस पडोसी को जब मन आए दीवाली मनाने लगता है । हम हैं कि अपने पड़ोसी की इस हिमाकत पर जल -भुन कर राख होते रहते हैं। हमारे दुबले-पतले कवि कभी पड़ोसी को  धूल चटाते हैं, कभी  नामोनिषान मिटाते है और कभी सबक सिखाने  की बात करते है। ये वे ही हैं जो कभी शायद काकरोच भी नही मार सकते परन्तु उन्हे तो बस जनता को उकसाना हैं और वे उकसाते भी हैं। हमारे हुक्मरान भी ईट का जवाब पत्थर से देने की बातें करते रहते है। अब जब सब कुछ हो ही रहा है तो हमारा ये पड़ोसी अंग्रेजो के जमाने के जेलर की तरह सुधरता क्यों नही है ?

                 आम जनता के पास तो पाकिस्तान को जवाब देने का

कोई तरीका ही नहीं हैं लेकिन हमारी आम जनता ने भी उस पड़ोसी की कारगुजारियों को अपने दिल में बसा कर रखा हुआ हैं । हालत यहॉ तक है कि अब तो हर घर मे पाक स्थान को लेकर सरकार भी चिंतित दिखाई देती है। जिनके घरां में पाक स्थान हैं, वे तो सुबह -सुबह वहॉ  जाकर दो चार बम गिराकर मन को हल्का कर ही लेते हैं। जिनके घरों में पाक स्थान नहीं है वे अक्सर ही सुबह और शाम में पाक स्थान की खोज में सडकों ,खेतों और रेल लाईनों की तरफ लोटा ले कर जाते हुए दिखाई देते है । जब वे पाक स्थान पर बमबारी कर रहे होते है तो उनकी बदले की भावना इतनी बलवती होती है कि वे अपनी शर्म और दूसरां की लाज तक भूल जाते है ।

         साहब , पाक स्थान हमारे घरों का अभिन्न हिस्सा है । किसी महात्मा ने तो इसे मंदिरों से भी अधिक महत्वपूर्ण बताया है । वैसे ऐसा भी ज्ञात हुआ है कि जल्दी ही एक आंदोलन खडा होने वाला है जिसमें किसी महापुरुष के पाक स्थान को पुनः स्थापित करने का संकल्प लिया जा रहा है । अब वे लोग शपथ ले रहे है कि पाक स्थान वहीं बनेंगा । कब बनेगा और कैसे बनेगा ये बाद की बात हैं, लेकिन बनेगा जरुर । वो बने या न बने नारे तो लगाने होगें यही नारे तो सत्ता के गलियारों में स्थान दिलाते है । पाक स्थान  वह जगह है जहॉं आप यदि समय पर पहुॅच जाए तो पाक याने पवित्र हो जाते है ं और देर हो जाए तो नापाक याने अपवित्र उसके साथ ही साथ अधोवस्त्र बदल कर स्नान ध्यान करना होता है । कुछ लोगों को सारा का सारा संसार ही पाक स्थान दिखाई देता है वे जहॉं बैठ गए बस उसे कर दिया पवित्र । अब बाद में उस स्थान से जाने वाला नाक पर रुमाल रख कर जाए तो जाए उनकी बला से । किसी-किसी गॉंव में तो पूरा का पूरा गॉंव ही पाक स्थान को खोजता है और वहॉ इस चक्कर में आज भी बारुदी सुरंगें सुबह और शाम को सडकां के किनारे प्राप्त हो ही जाती है । इस चक्कर में अक्सर ही लोग घायल होते रहते है । वैसे मैं आपको बता ही दूॅ कि अब पाक स्थान हर गॉव में घर-घर तक पहुॅच गया है लेकिन केवल सरकारी कागजों में ।  आपको अब भी लोग पाक स्थान खोजते हुए या बाकायदा  बम गिराते हुए मिल सकते है । इन पाक स्थानों के बनाने वाले अमले का हाजमा अच्छा है क्यांकि जो लोग बाहर पाक स्थान खोज रहे है उनके पाक स्थान इस अमले के पेट में न जाने कब चले गए ये बात किसी को भी नहीं मालूम है । अब यदि हम सीमा की बात करे तो सीमा पर इस अमले को भेज  देना चाहिए इन्होनें पाक स्थान खाए है, ये पाकिस्तान को भी .......................।

                                आलोक मिश्रा



                 
               
             
   
               9425138926