Thursday, December 28, 2017

Yes ... sir यस...सर ( व्यंग्य )

            यस...सर

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- मुझे आपकी जॉंच हेतु भेजा  गया है।
- सर  ... सर...बैठिए ना आप क्या लेंगे ... ठंडा... या गरम..?
- केवल आप के बयान और कुछ भी नहीं ।
- सर... ऐसा कैसे हो सकता है? विभागीय कार्यवाही तो होती रहेगी।
- हॉं... वो तो होनी ही है । आप तो अपना जवाब बनाईए कि आप ने रामलाल से रिश्वत में    दो........ क्यों लिए थे ?
- सच कहॅुं तो...तो उसने मुझे एक ही दिया था ; आरोप दो का लगाया है ।
-तो आप लिख दें कि एक ही लिया था ।
- ये कैसे लिख सकता हुंॅ? उसका सत्तर परसेंट तो बॉंट चुका हुॅं।
-तो क्या....? आप उनके भी नाम लिख दें ।
-सर..... ऐसा कैसे हो सकता है ? सब तो अपने ही है ।
-तो...मै लिख दूॅं ?
-सर आप अपने बॉस का नाम कैसे लिख पाऐंगे। इसलिए आप भी न लिखें ।
-फिर
-फिर क्या ? आप भी पंद्रह परसेंट ले लें ।
-बीस
-ज्यादा है
-बीस से कम नहीं ।
-ठीक है ।
-तो फिर ... लिख दो आप को फंसाया जा रहा है ।
-..................
-और जिन्हें हिस्सा दिया था उनसे लिखवा लें कि आप एक ईमानदार आदमी है ।
-आप जैसा कहें।
-और...... बॉस से मिल लेना ।
-यस.....सर..
- शाम को आप हॉटल मे आ जाए बाकी कार्यवाही वहीं हो जाएगी।
-यस.... सर..                                        
                                   आलोक मिश्रा

                                     Yes ... sir




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- I have been sent for your enquire.
- Sir ... Sir ... sit down what will you take ... cold ... or hot ..?
- Only your statement and nothing.
- Sir ... how could that be? There will be departmental proceedings.
- Yes ... that's it. You make your own answer that why did you take Ramlal to bribe for two ..why?
- To tell the truth ... so he gave me only one; The allegations have been leveled against two.
 -So you  write that someone took the same.
- How can I write this? His seventy percent of his earnings will be Shared in others
-So what....? You write their names too.
-How can this happen? Everything is its own.
-So ... I write?
-How can you write your boss name? So you do not even write.
-THEN
-Then what ? You also take fifteen percent of you.
-Twenty-two
-Is more
-Not less than twenty.
-Okay .
-Then write ... you are being framed.
-..................
-And write with the person who had given the share that you are an honest man.
-As you say .
-And ...... to meet the boss.
-Yes ..... Sir.
- In the evening you come to the hotel, the rest of the proceedings will be there.
-Yes .... Sir.
             
alok mishra 

बीबी के ‘‘ऐ जी.............’’( व्यंग्य )


पति पत्नी के लिए इमेज परिणाम
        सुरेन्द्र शर्मा बड़ा भला सा नाम था उनका छैल-छबीले, बांके    जवान उन्होने शादी क्या की जैसे अपना नाम ही खो दिया जब उनकी पत्नी उन्हें जी........., सुनते हो जी............ से संबोधित करने लगी उन्हें भी ये संबोधन अपने उपनाम सा लगने लगा पड़ोसी की पत्नि भी अपने पति को  जी कहकर बुलाती तो सुरेन्द्र शर्मा जी आता हॅूं कह कर चल देते इस चक्कर में मोहल्ले के लोग सुरेन्द्र शर्मा जी के चरित्र पर शक करने लगे ये ‘‘ जी............’’ का संबोधन प्रारंभ से उन्हें अत्यंत ही प्रिय लगता था परंतु समय के साथ-साथ इसे सुनते ही उन्हें लगता कि वो परेड में खड़े है और सावधान होने का निर्देश मिला है अब वे ‘‘ जी..........’’ सुनकर सावधान हो जाते खॅूटी पर टंगे थैले को उठाने के बाद ही बोलते ‘‘भागवान.......... बाजार से क्या लाना है’’ पत्नी खुश ’’भागवान’’ जो कहा वो भागवान का अर्थ भाग्यवान से लेती  है सुरेन्द्र शर्मा जी भी खुश वे भागवान का अर्थ भागने का आव्हान करने वाली से लेते है
        ऐसा भी नहीं कि सुरेन्द्र शर्मा जी जीवन पर्यंत ऐसी ही बने रहे अब विवाह हुआ था सो उन्हें दो से तीन होना ही था बस उनके घर में मुन्ना गया मुन्ने के नामकरण के साथ ही साथ शर्मा जी को भी दूसरा नाम मिल गया अब उनकी भागवान उन्हें ‘‘मुन्ने के पापा’’ कहकर संबोधित करने लगी सुरेन्द्र शर्मा जी ने गौर किया तो पाया कि अकेले में ‘‘ जी............’’, ‘‘सुनते हो जी ...........’’ और ‘‘ जी ...........’’ पहले की तरह था परंतु बाहर मेले, विवाह और पार्टियों में वे ‘‘मुन्ने के पापा’’ हो जाते उनकी पत्नी अक्सर ही जब किसी भद्र महिला से उन्हें रस भरी बातों मे मग्न देखती तो ‘‘मुन्ने के पापा...............’’ संबोधन द्वारा ही उनकी तन्मयता को तोड़ती है अब वह संबोधन एक तीर से दो निशानांे को साधता एक तो शर्मा जी को याद दिला देता कि भागने का आव्हान हो चुका है दूसरा उस भद्र महिला को भी सचेत कर दिया जाता कि शर्मा जी केवल विवाहित वरन् मुन्ने के पापा भी है इन परिस्थितियों में शर्मा जी केवल झुंझला कर रह जाते उन्होनें कई बार यह समझाने की कोशिश की कि ऐसे अवसर पर उन्हें पढ़ी-लिखी  महिला की तरह उनके नाम से या शर्मा जी कहकर संबोधित किया करे उनकी बीबी कहां मानने  वाली थी कहती मै तुम्हारा नाम नहीं ले सकती
        ऐसा नहीं कि शर्मा जी के यहाॅं मुन्ने के बाद कोई और आया हो उसके बाद मुन्नी और गुडडू भी हुए परंतु शर्मा जी मुन्ने के पापा ही रहे धीरे-धीरे शर्मा जी के वे दिन भी आए कि बालाएॅं उन्हें अंकल बोलने लगी उनके सर के बीचो-बीच एक हवाई पटटी के आकार का निर्माण होने लगा दाढ़ी, मूॅछ और सर के बाल सफेद होने लगे अब बीबी मुन्ने के पापा कहती तो सुरेन्द्र शर्मा के इंजीनियर पुत्र को उनसे अधिक बुरा लगता
        अब मुन्ना बुरा मानने योग्य जो हो गया है वो भी अपने इस उपनाम के सार्वजनिक होने में शर्म महसूस करता है धीरे-धीरे शर्मा जी की बीबी को यह लगने लगा कि यह संबोधन उचित नहीं है इसलिये कभी-कभी धीरे-धीरे से बुढढा, खडूस और बुढऊ संबोधन का प्रयोग करने लगी शर्माजी को प्रारंभ में आपत्तिजनक लगा लेकिन पुराने संबोधन की ही तरह उन्होने इसे भी स्वीकार ही लिया।
        हमारे शर्मा जी बदले हुए संबोधनो के साथ जीवन जीने को विवश रहे उनकी इस विवशता का कारण भी उनकी एक और केवल एक अदद पत्नी रही  वे मरते दम तक बुढ़ऊ बने रहे वे जब अंतिम सांस भी ले रहे थे तो बस एक ही आस थी कि उनकी बीबी एक बार कह दे ‘‘बुढ़ऊ बहुत हुआ नाटक चल उठकर बैठ जा।’’ सच कहता हॅूं उनकी बीबी अगर एक बार ऐसा कह देती तो वे चटपट घबराकर उठ कर बैठ जाते और आज उनकी फोटो पर माला टंगी   होती

                                                                        आलोक मिश्रा